जीवन, रिश्ते और विश्वास..

Standard

” रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय. टूटे पे फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परी जाय. “

कबीर का यह दोहा बचपन से कई दफा सुना था। वैसे तो याद भी हो चुका है । स्कूल में हिंदी कि शिक्षिका ने इसका उदाहरण कर के ही दिखा दिया था। तो कबीर के कुछ दोहों में एक यह है जो मुंह जबानी याद ही रह गई।

वैसे जीवन में ऐसे व्याख्या होते रहते है, की यह सब से हर इंसान जोड़ लेता है खुद को पर कभी कभी दिल सच्चाई स्वीकारना ही नहीं चाहता। विश्वास और प्रेम की डोर बहुत कच्ची होती है बिल्कुल सुई धागे वाले धागे की तरह। वो धागा भले खुद कच्चा हो, लेकिन बहुत फटे चीज़ों को जोड़ डालता है। और ऐसा जोड़ता है कि फिर बहुत कोशिश पर ही दुबारा फट पाता है।

ऐसे ही मनुष्य के जीवन के रिश्ते होते है। हम बहुत विश्वास कर के किसी दूसरे इंसान के साथ अपना रिश्ता जोड़ते है फिर चाहे वो दोस्ती का हो या फिर प्रेम का। आंख बंद कर के भरोसा करते है और फिर क्या होता है एक दिन वो इंसान उस भरोसे को चकनाचूर कर के चला जाता है और हम असहाय सा खड़ा देखते रहते है। खुद ही यकीन नहीं होता कि यह हमारे साथ क्या हुआ।

जब प्रेम का रिश्ता शुरू होता है तब दो लोगों की मंजूरी चाहिए होती है तो खत्म करते वक़्त एक की ही मर्ज़ी क्यूं? एक का मन भर गया और उसे अब छोड़ के जाना है इसलिए अब रिश्ता खत्म। उस दूसरे इंसान ने क्या बिगाड़ा है जो गुट गुट के अब सारी जीवन को बिताएगा ? हर पल मरेगा! हर एक सेकंड उसको काटेगा ! मौत को गले लगाने का मन करेगा उसका । उसने तो वफादारी से रिश्ता निभाया था तो उसको ही सज़ा क्यूं मिल रही? एक सेकंड में जिसको वो अपने जीने की वज़ह समझता है वो उसके जीवन को ज़िंदा लाश बनाने की वज़ह बन जाता है।

ठीक ऐसे ही दोस्ती का रिश्ता होता है। बहुत नाज़ुक होता है पर बहुत सारा विश्वास पर टिका रहता है। लोग अक्सर अपनी दोस्ती की मिसाल देने लगते है और फिर उन में से एक दोस्ती को दिल से ना निभा रहा हो! तो उस में उस दूसरे इंसान की क्या गलती? उसको क्यूं सज़ा मिलती है। वो क्यूं सोचने पर मजबूर रहता है कि कहां कमी रह गई थी। वो इंसान कितना गुटन महसूस करता है वो तो कोई समझ नहीं पाता। कितनी रातें यहीं सब सोचते सोचते बीता डालता है।
विश्वास का टूटना सब से बुरा होता है और अगर वो किसी इंसान का बार बार टूटता है तो वो इंसान को विश्वास तोड़ने वाले से नफ़रत नहीं होती है । बल्कि खुद से नफ़रत होती है कि शायद मेरे में ही कोई कमी है। मैं किसी के लायक है। और किसी इंसान का खुद से नफ़रत सब से बुरा होता है।

कितना आसान होता है सब के लिए कहना “मूव ऑन” कर जाओ। काश जितना छोटा यह शब्द है, जितना आसान होता है लोगों के लिए कहना इतना ही आसान होता करना भी। तो फिर दुनिया जीना बहुत आसान होता । ऐसा है लोगों के लिए आसान भी होता है पर जो लोग नहीं कर पाते उनका क्या ?

भावनाओं की कोई क़दर नहीं रह गई इस युग में। एक इंसान को तब ही कोई इंसान अच्छा लगता है जब वो सुंदर भी हो। अब प्यार पहले सुरत देख कर बाद में सीरत देख कर होता है। फिर भले वो सांवले रंग वाले इंसान को कितना भी प्रेम क्यूं ना हो, उसका प्रेम सुंदरता के आगे फीका पड़ ही जाता है। भावनाएं तो तब कोई किसी की समझेगा जब कोई किसी की क़दर करेगा, समझने की कोशिश करेगा। पर अपना वक़्त बर्बाद करना ही नहीं चाहता कोई? एक इंसान अपनी जान से ज़्यादा किसी से प्रेम कर बैठे पर दूसरे को एक ज़रा फर्क ही ना पड़े। कितना अन्याय है यह तो? उस इंसान की हालत का अंदाज़ा भी नहीं लगा पाता कोई क्यूंकि दुनिया के सामने वो हमेशा हंसते खेलता रहता। वो तो अकेलापन एक मात्र उसका साथी रह जाता है।

मुझे भगवान से बहुत शिकायतें है इस ही वजह से। उन्हें तो पता होता है कि एक इंसान का स्वभाव कैसा है तो उसके साथ बुरा क्यूं होने देते है। भगवान को तो पता होता है कि यह इंसान का सिर्फ दिल ही नहीं बल्कि वो इंसान खुद भी पूरा टूट जाता है। तो ऐसा होने से उनको बचाना चाहिए ना। पर वो भी पता नहीं किसकी सुनते है, किन का साथ देते है वो आज तक समझ नहीं पाई। भगवान को इतने भावुक इंसान को इस युग से बचाना चाहिए ना ? क्यूं भगवान ऐसे लोगों को मिलवाते है उन लोगों से जो उनको तोड़ डालता है। इंसान तो तोड़ के चला जाता है दूसरा इंसान अपने अन्दर कमियां ढूंढने में सारा समय लगा डालता है , परिणाम कुछ नहीं होता बस वो अंदर अंदर पल पल मर रहा होता है।

निधि (14/7/2019) (7:00 pm)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s