A STORY BETWEEN THE LINES

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BLURB :

Adi, a soft rebel with a strong mind, challenged the world with his smile. Nila, an innocent girl with a beautiful heart, loved the world with all she had. Love sparkled at the mountains, when Adi’s adrenaline lost to Nila’s serenity. Life struck them hard even before it started. Adi woke up in a hospital, all alone, remembering nothing from his recent past.With memories betraying him, he trusts his love to lead him to Nila. Running against time, he felt truth closing in from all directions. The more the answers he got, the further his destination became. Adi dared the distance which was a war-torn land, engraved with scars. Can Adi’s journey lead to his destination? Or was the journey a destination by itself?

MY REVIEW :

“A story between the lines”, by Santosh shivaraj is a book that will teach you what all life does to us. The cover of the book is simple, sober yet beautiful. The blurb itself is so intriguing that one will feel much excited to turn the pages soon.The book holds the story of Adi who looses his memory but has a slight memories of his wife, Nila. Adi leads a struggleful life with lots of pain. He is in search of his love. Adi search for Nila is something that made me believe in passionate love.
There are other characters in the book like Salim, Dr. Ali who teaches us lesson of life through their characters.
The escape programme specially is something different that the author has written and I am sure this would have a great imapct on reader’s mind. Towards the end, one will surely feel that this book is a story between the lines like the title of the book say.The book is written in simple language and the author has well portrayed each character. The writing style of the author is amazing and I personally liked the narration skill of the author. Another aspect that makes the book amazing is each line speak emotions. Apart from everything, any lesson that the book teaches , the best part is the book teaches the lesson of humanity. Overall, a wonderful loveable read.

RATING : 5/5

ORDER THE BOOK FROM : https://www.amazon.in/Story-Between-Lines-Santhosh-Sivaraj/dp/B07SHF1Y7T/ref=mp_s_a_1_2?keywords=a+story+between+the+lines&qid=1574215215&sprefix=a+story+bet&sr=8-2

वो एक लड़का ….!

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” अरे , लड़के रोते नहीं ! ”
” गुड़िया से खेलोगे लड़का हो कर ! ”
” मर्द को दर्द नहीं होता ! ”
” लड़के कभी झुकते नहीं! ”
” लड़के और घर का काम, कभी नहीं! ”

ऊपर लिखी सारी बातों ने हमारे समाज को बर्बाद कर रखा है , और लोग कहते है कि आज के बच्चों में संस्कार नहीं है , क्यूंकि आज कल के 80% बच्चे ऊपर लिखे बातों को नहीं मानते।

अगर ऊपर लिखी बातें संस्कार तय करते है तो पूरे सम्मान के साथ, मुझे यह कहने में बिल्कुल हिचक नहीं होगी कि आपकी सोच गंदी है ,आप अपने दिमाग को थोड़ा सर्फ एक्सेल ( SURF EXCEL) मिलाए ताकि अंदर की गन्दगी साफ़ हो।

लड़का हो या लड़की, भगवान ने सबको एक बराबर बनाया है। दो आंखें, 1 नाक, 1 मुंह, दो कान, दो हाथ और दो पैर , एक समान सब को दिया है तो यह भेद भाव क्यूं ?

लड़के क्यूं नहीं रो सकते? अगर उन्हें तकलीफ़ होती है तो क्या उनका इतना भी हक नहीं की वो भी रो कर अपना दिल हल्का कर ले। किसी के छोड़ जाने का, किसी के मरने का, दिल के टूटने का लड़के को भी बराबर दर्द होता है तो उन्हें रोने का अधिकार क्यों नहीं है ?

गुड़िया लड़की के खेलने की चीज़ है , यह बचपन में तय कर देते है और फिर इस ही मानसिकता के साथ बच्चा बड़ा होता है। कम से कम खेलने वाले वस्तु में तो अंतर नहीं रखो।

और जो लोग कहते है मर्द को दर्द नहीं होता, वो खुद को खींच खींच कर 10 थप्पड़ जड़ दे और देखे दर्द क्या होता है। चाकू ले कर अपनी एक उंगली काट के देखे और फिर बताएं की दर्द नहीं होता है।

बाकी आखिरी दोनों मुद्दों पर तो घंटो तक बहस छिड़ जाएं। जब एक लड़की अपना घर, अपने माता – पिता को छोड़ कर , अपने सपनों को कुचल कर आती है अपने पति के घर और उनकी सारी बातें मानती है तो क्या हुआ अगर उसका पति भी कुछ बातें उसकी मान ले तो। ऐसे मर्दों को तुरंत यह समाज “जोरू का गुलाम” घोषित कर देता है , जो अत्यंत दुखदाई है।

जब किसी की बेटी नौकरी कर सकती है तो उसका बेटा खाना क्यूं नहीं बना सकता। क्या फ़र्क पड़ता है कि खाना किसने बनाया है? तय करने वाला कौन है की खाना लड़की ही बनाएगी और लड़का पैसा ही कमाएगा।

आज मैंने यह इसलिए लिखा क्यूंकि, एक लड़के के ऊपर बहुत जिम्मेदारियों का बोझ होता है, और वो पूरे करते करते उसकी उम्र निकल जाती है और वो खुद के लिए नहीं जी पाता। पैदा होते ही सब से पहले उसके सर चिपका दिया जाता है, ” घर का नाम यहीं रौशन करेगा ! ”

जैसे जैसे वो लड़का बड़ा होता है यह एक वाक्य उसको अन्दर अंदर खाता है। जब वो बहुत मुश्किलों से लड़ता है पर नौकरी पाने में असफल हो जाता है। वो अंदर कितना तकलीफ़ में हर एक पल गुजारता है उसका आभास तक कोई नहीं करता बस तुरंत पूरा परिवार, समाज उसको नालायक घोषित कर देता है। एक लड़का नौकरी पाने के लिए अपने परिवार से दूर, किसी शहर के एक कमरे में काट रहा होता है अपना एक दिन । मां के होते हुए भी कोई उसके पास नहीं होता जो सर पर हाथ फेर कर पूछे की मेरे बेटे ने खाना खाया। मां परेशान ना हो इस खातिर जब वो बेटा बीमार होता है तो भी नहीं बताता दूर बैठे अपने मां – पिता को जो परेशान हो जाएंगे। वो एक लड़का क्या बनना चाहता है यह कोई पूछता तक नहीं, और थोप देता है अपने मन की ख्वाहिश जिसे पूरा करना उसके लिए एक जंग के बराबर हो जाती है। एक लड़का जब अपनी पहली कमाई पाता है तब ही सोच लेता है कि वो इन पैसों से किसके लिए क्या उपहार लेगा। भले उसकी तनख़्वाह उसकी सपनों से कम है, पर उसकी यह सोच सब का दिल को खुश करने वाला सर्वोपरि है।

वो एक लड़के का जब कोई दिल तोड़ देता है तो किसी को कुछ नहीं कह नहीं पाता क्योंकि उसके ऊपर जिम्मेदारी होती है जिसे उसे पूरा करना होता है और उस खातिर वो खुद को मार डालता है , अपनी भावनाओं को एक कोने में। वो एक लड़का जब अपनी बहन को देखता है एक लड़के के लिए रोते हुए, तो दिल ही दिल प्रण लेता है वो कभी किसी लड़की का दिल नहीं तोड़ेगा। उसे आभास रहता है कि कितनी तकलीफ़ होती है एक इंसान को जिसको छोड़ कर लोग चले जाते है बीच सफर में।

वो एक लड़का जब अपनी मां और बीवी के बीच में फंसा होता है, जो जानता है कि अगर थोड़ा थोड़ा दोनों खुद को बदल लेंगी तो घर में शांति ही होगी पर कुछ नहीं बोल पाता क्यूंकि अगर उसको कभी 1 को चुनने को बोला जाएगा तो वो उसके लिए मौत के बराबर होता है।

वो एक लड़का जब पिता बनता है तो ज़िम्मेदारियों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि कंधे झुक जाते है पर हौसलें बुलंद रहते है। कैसे वो अपने बच्चों की हर एक ख्वाहिश पूरी करने के लिए , बेसब्र रहता है और बचाता फिरता है अपने बच्चों को पूरी दुनिया की बुरी नज़र से।

वो एक लड़का बहुत कुछ सहता है। पर समाज कब समझेगा की एक लड़का, एक बेटा, एक भाई, एक प्रेमी , एक जीवन साथी बनने से पहले वो एक इंसान है, जिसके अंदर भी भगवान ने दिल दिया है, भावनाओं से भरा हुआ , जिसकी कद्र करना चाहिए। उसकी ख्वाहिशें, उसकी तकलीफ़ को कब समझेगा समाज ! वो एक लड़का बहुत कुछ से गुजरता है … उसे भी रोने का, चिल्लाने का, नखरे दिखाने का अधिकार है। वो एक लड़का , हां वो एक लड़का , पहले एक इंसान है।

Happy International Men’s Day ❤

– Nidhi ❤ (19-11-2019)

काश ! तुम लौट आती ….

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This is a long story written from two point of view. Read till end. 💜

फोन की घंटी बज रही थी । एक बार, दो बार , तीन बार । किसी ने उठाया ही नहीं । अभय अपनी दुनिया में मस्त, अपने बजते फोन को देख रहा था लेकिन उठा नहीं रहा था।
लाइट जल जल कर बंद हो जा रही थी उसकी आंखों के सामने लेकिन वो फोन उठाना ही नहीं चाहता था। उसे दिख रहा था कि फोन श्रुति कर रही थी। हां, वहीं श्रुति, जिसका दिल रखने के लिए, अभय ने उससे दोस्ती कर ली थी। हां, वहीं श्रुति जो अभय के प्यार में पागल हो चुकी थी। हां वहीं श्रुति जो पूरी दुनिया के सामने शांत, पर अभय के सामने चुप होने का नाम नहीं लेती थी। खैर, और एक बार फोन बज कर कट गया।
” गुस्सा हो? ”
” अरे क्या हुआ बोलो ! ”
” arrrghhh”
” अरे प्लीज़ कुछ तो बोलो ! ”
” देखो यह ना बहुत गलत बात है तुम मेरे मेसेज का जवाब नहीं देते ! ”
और ऐसे ही ना जाने कितने अनगिनत मेसेज भी भेज दिए थे श्रुति ने जो अभय जान मुच कर नहीं खोलता था ।
और ना ही जवाब दिया करता था। पागल श्रुति , दिन भर फोन हाथ में थामे उसका इंतज़ार करती थी। खैर, ना श्रुति की इंतज़ार करने की आदत गई और ना ही अभय कभी समझ पाया कि कितनी ज़्यादा चाहत है श्रुति के प्यार में।

वक़्त यूं ही बीतता गया श्रुति कोई कसर नहीं छोड़ पाती थी अपने प्यार का एहसास कराने का। उसने अपने मन में तो कई सपने बुन रखे थे, लेकिन अभय के सामने कहने में बहुत हिचकिचाती थी। तोड़ तोड़ कर श्रुति ने अपने कुछ ख़्वाब अभय को बता दिया था । पूरे तो नहीं होंगे यह दिल जानता था, फिर भी एक उम्मीद थी । वक़्त बीतता गया था पर कुछ भी नहीं बदला। ना श्रुति का प्यार कम हुआ और ना ही अभय का प्यार जागा।

बाकी सब भले ही बहुत अवगुण हो श्रुति में, पर सब से बुरी आदत थी उसकी की भावुक बहुत जल्दी हो जाती थी । आंसू आंखों के कोने में ही टीका रहता था। बातें जल्दी बुरी लग जाती थी और कोई तेज़ आवाज़ में बात कर ले तो मानो समुन्द्र बहना तय था।

इस बार फिर वहीं हुआ, श्रुति ने अभय को फोन लगाया, अभय झल्ला उठा। बहुत तेज़ का चिल्लाया। ऐसा की श्रुति खामोश हो गई। कुछ बोल ही नहीं पाई। चुप चाप फोन काट दिया क्यूंकि उसका अभय जो दुनिया से प्यार से बात करता है, कैसे ऐसे बात कर सकता है। आखिर इस ही प्यार से बात करने की वजह से तो अपना दिल हारी थी वो। शांत सी स्थिर हो गई श्रुति। बिना कुछ कहे अभय के दफ्तर गई। अभय का एक सामान बहुत दिन से श्रुति के पास था । उसको चुप चाप वो सामान थमा कर लौट गई। अभय वो सब सामान ले कर घर आया। घर पहुंच कर अपने बैग से वो सामान निकाला। उस में से अलग अलग सामन निकले। एक डायरी थी जिस में श्रुति ने मन खोल कर लिखा था कि अभय क्या मायने रखते है उसके जीवन में। अपने बारे में खुद इतना पढ़ कर अभय विचलित हो रहा था। एक कैसेट थी जिस में अभय और श्रुति के पसंदीदा गानों की रिकॉर्डिंग थी , अभय की बहुत तस्वीरें जो उसे अवॉर्ड मिले थे उसकी कामयाबी के लिए, और एक तस्वीर थी अभय और श्रुति की साथ जो एक फंक्शन में उन्होंने साथ खींचवाई थी। डायरी के अंत तक आते आते अभय की आंखे भर आई थी। ” सुनो, अपना ध्यान रखा करो, इतने व्यस्त नहीं हुआ करो की अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाओ। तुम पर काला रंग बहुत जजता है, और सुनो अब मैं कभी तुम्हें तंग नहीं करूंगी, इतने परेशान नहीं हो। ”

आखिरी पन्ने पर श्रुति ने बहुत सुंदर अक्षर में लिखा था, ” तुम्हें जीवन में सच्चा प्यार नसीब हो, बहुत खुशियां मिले, और हां अगर अगले जन्म में फिर मुलाक़ात हुई तो मैं भी बिल्कुल तुम्हारी तरह प्रैक्टिकल बन कर आयूंगी । एकदम नए ज़माने वाली। ”

श्रुति ने उस शाम पूरी तरह तय कर लिया था कि कितना भी मुश्किल हो पर कैसे भी अभय के बिना ही जीना होगा। एक सेकंड भी काटने को दौड़ता था पर काटना होगा। अभय श्रुति रोज़ तो मिलते थे। दोनों एक ही दफ़्तर में काम करते थे। लेकिन दोनों ने कभी बात नहीं की उस बीच।

एक दिन श्रुति दफ़्तर आ ही रही थी कि सामने से गुजरती एक तेज़ रफ़्तार बस ने ऐसी ठोकर मारी की श्रुति हमेशा के लिए खामोश हो गई। श्रुति की मौत की खबर अभय को कुछ दो दिन बाद मिली।आज अभय पहली बार श्रुति को ले कर भावुक हो रहा था। आज अभय को श्रुति बहुत याद आई।

बच्चों की तरह उस डायरी को पकड़ कर दफ्तर में एक कोने में बैठ कर रो रहा था। आज श्रुति का दिया सब समेट कर रखने का जी चाह रहा था, अभी श्रुति लौट आए तो जी भर गले लगाने का मन हो रहा था पर अफ़सोस अभय जब तक श्रुति का प्यार समझता बहुत देरी हो गई।

बहुत परेशान था श्रुति के बोलने से, पर अब श्रुति कभी अभय को तंग नहीं कर सकती थी….. !

कभी कभी किसी इंसान को ज़्यादा नज़र अंदाज़ करते करते , एक दिन वो इंसान यकीनन बहुत दूर हो जाता है और फिर कितना चाहो वो लौट के नहीं आ पाता .. !

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श्रुति,

आज तक मैंने तुम्हें कभी कुछ नहीं कहा, ना कभी समझा पाया। तुम्हारे जाने का बहुत दुख है, अंदर से आत्मा में तकलीफ होती है कि तुम चली गई हो। तुम्हारे जाने के 15 दिन बाद पता चला कि तुम्हारी मौत एक हादसा ही था और तुमने आत्म हत्या नहीं की थी। तब जा कर मन संतुष्ट हुआ था। एक भारीपन कम हुआ मन से।

देखो वक़्त हर एक घाव भर देता है, तुम भी मेरे बिना जीने लगती। मेरी भी कुछ मजबूरियां थी कि मैं तुम्हें अपना नहीं सकता था। तुम ही बताओ क्या यह तुम्हारे साथ इंसाफी होता कि तुम्हें प्यार का झूठा सपने दिखा कर बाद में तुम्हें छोड़ देता। तब कैसे बिताती यह ज़िन्दगी तुम ? तब और कितनी मुश्किल होती। पर यह सब बोला नहीं गया कभी।

मैं समझता सब था लेकिन क्या बोलता यहीं बस खुद को समझ नहीं आया कभी। तुम्हारे मन में अपने प्रति भावनाएं पढ़ कर बहुत विचलित हुआ था मन की कैसे मुझे बिल्कुल ना जानते हुए तुम मुझे इतना ज़्यादा जान गई। कैसे तुम मुझसे इतना प्यार करने लगी। क्यूं तुम्हें मैं इतना पसंद आने लगा। मैंने कई बार तुमसे जान मुच कर भी मुंह फेरा ताकि तुम समझ जाओ और खुद चली जाओ पर तुम बहुत ज़िद्दी , एक टक टिकी रही। हां गलती मेरी बस यह है कि तुम्हे कभी खुल कर बोलने का मौका ही नहीं दिया। समझने की कोशिश ही नहीं की।

तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारी एक दोस्त से मिला। उसने और एक डायरी थमा दी। इस बार दिल में डर था उसको खोलने से पहले फिर भी हिम्मत कर के खोली। उस डायरी से जाना मैंने असली श्रुति को। कितना बचपना था तुम में, तुम्हारी ख्वाहिशें कितनी बड़ी थी तुम दुनिया के लिए जीना चाहती थी। दूसरों की खुशियां ही तुम्हें खुशी दे जाती थी। तुम्हारे ना ख़त्म होने वाले ख़्वाब पढ़ते पढ़ते चेहरे पर हंसी, आंखों में नमी सब कायम थी।
खैर, वक़्त का खेल था कुछ बदल नहीं पाया। तुम भी चली गई, मैं अभी भी वैसा हूं, तुम्हारे प्यार के लिए मेरे दिल में इज्ज़त हमेशा से थी पर अब हाल कुछ यूं है कि मैं वो दोस्ती वाला रिश्ता जो तुमसे साझा किया था वो जगह भी किसी को नहीं दे सकता। तुम याद बहुत आती हो….. !

– अभय

– Nidhi ❤ (15-11-2019 ) ( 9:56PM )

करवा चौथ, चांद और आप ! ❤

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करवा चौथ के दिन चांद का जैसे सब को बेसब्री से इंतजार रहता है, ठीक वैसे ही रोज़ शाम मुझे आपका रहता है। चांद भी बाकी दिन जल्दी आ जाएगा पर करवा चौथ के दिन उसके भी अलग भाव रहते है। वो भी पूरी साज़ सज्जा के साथ आएगा। और भला उसके नाटक हो भी क्यों ना ? पता है उसको भी उसके गए बिना तो यह पर्व पूरा ही नहीं होगा। गौर से देखो अगर उस दिन के चांद को तो उसकी चमक भी कुछ अलग होती है , और सुंदरता भी। हर कोई बार बार जैसे उस दिन आ कर चांद को ढूंढ़ता है वैसे ही रोज़ मैं छत पर आ कर आपकी राह तकती हूं। घंटों बाल्कनी में खड़ी अपने फोन को थामे रहती हूं। जैसे ही आसमान में हल्की सी झलक होती है और लोग खुशी से भागते है चांद की ओर, वैसे ही जैसे ही इस फोन में हल्की सी भी हलचल होती है , दौड़ पड़ती हूं मैं भी उसको खोलने के लिए, आंखों में चमक लिए पर उदासीन हो कर बैठ जाती हूं। दिल जानता है कि आप नहीं आएंगे , दिमाग दिल को समझा रहा होता है की छोड़ दो इंतज़ार , दिमाग बार बार कह रहा होता है कि वो इंसान है, चांद नहीं; जो तुम्हारी तड़प देख कर आ जाएंगे; पर दिल कहां मानने वाला । वो एक छोटी झूठी आस लिए बैठा ही रहता है।

खैर, चांद और आप में एक चीज़ बहुत ही समान है, एकदम चांद की तरह शीतलता है आप में। वहीं चमक , वहीं शांति । जैसे सुकून प्रदान करता है वो अकेला चांद लाखों को, वैसे मेरे जीवन में वहीं सुकून प्रदान करते है आप। लोगों को चांद से भी बहुत शिकायतें होती है वैसे ही मुझे भी होती है ; पर कोई क्या भला मुंह मोड़ पाया है उस चांद से ; बिलकुल वैसे ही कितनी भी तकलीफ़ होती है मुंह नहीं मोड़ पाती आपसे।

करवा चौथ का व्रत तो लोग करते है उनके लिए जिनसे वो प्रेम करते है; उनकी लंबी उम्र के लिए, उनके अच्छे कामना की दुआ करते है। तो इसे धर्म, विवाहित, अविवाहित में बांटने का अधिकार किसी को भी कैसे हो सकता है?

सुनो ना, आज करवा चौथ है; हां जिस चांद से आपकी तुलना कर रही हूं उस ही चांद का दिन और आपका भी। आज तो आओगे ना बिन बुलाए मेरी गली में, चांद से पहले। या जब मैं गुजरूंगी आपकी गली से तो टकरा जाओगे ना मुझे उस ही मोड़ पर। मैं बेसब्री से इंतजार करूंगी आज भी एक झलक सब से पहले आपको ही देखने की। इंतज़ार करूंगी कुछ दो पल सुकून की, दो शब्द राहत के। पूछ लूंगी देखने के बाद भी आपका हाल, और आपके पूछने पर ठीक हूं वाला जवाब भी दूंगी। दिल की बात नहीं कह सकती , यह भी याद रखूंगी! सुनो ना, एक अजनबी सा चेहरा कब इतना खास हो गया यह समझने में बहुत देरी हो गई। इतनी हो गई कि उस खास की अहमियत बढ़ती रहती है। हां चाहा तो था मैंने पूरे रीति रिवाज़ से इस त्योहार को मनाने का। मेहंदी का बहुत बहुत शौक है मुझे, लिखवाना चाहती थी आपका नाम अपने हाथों पर! बहुत बार सब से छुपा कर लिखवाया भी है । शाम को चांद के बाद आपको ही देखने की चाह होगी पर मजबूर हूं , इसलिए दूर दूर से सब कामना करूंगी, आपकी लंबी उम्र की, आपकी खुशियों की! अब आपको अगर कुछ भी ना कहूं तो भी आप समझ लेंगे ना ! किसी ने सच ही कहा है, लड़कियां जब सच्चा प्रेम करती है तो भूल जाती है अपनी हद। पूरी तरह समर्पित करती है खुद को फिर चाहे परिणाम कुछ भी हो। आपको पाने की आस छोड़ दूं, यह दिल को समझाना मुश्किल है ना, आपसे मुंह फेर लूं, इतना दिल को मजबूत बनाने में वक़्त लगेगा ना !

डर लगता है कि कभी सब कुछ बताने से पहले कभी मेरी सांसे धोखा दे जाए तो क्या वो अनकहे शब्दों में ढूंढ लेंगे अपने लिए प्यार या किसी पुरानी किताब के फट्टे हुए पन्नों की तरह भूल जाएंगे मुझे , जो एक कोने में पड़े पड़े भूल गई अपने अस्तित्व को।

अब जब रोज़ उस पत्थर की मूर्ति के आगे आपको पाने की दुआ करती हूं, तो एक कोशिश उस चांद की पूजा कर के कर लिया जाए। सुनते है चांद अधूरे इश्क़ को पूरा करता है! क्या पता , कभी मुकम्मल कर दे वो चांद मेरी कहानी क्यूंकि जिस आसमान में वो चांद रहता है वो भी उतना ही तड़पती है धरती के लिए। मेरी तड़पन का एहसास कर के कर दे आपको मेरे नाम।

सुनो ना, बिना किसी हक का बहुत अधिकार दिखाती हूं आप पर, अब जब इस कहानी की मीरा ही रही, तो विष भी तो मीरा जैसे पीना ही पड़ेगा, अपने कृष्ण के लिए। क्या पता किसी रोज़ कभी सपना सच हो जाए, और बन जाऊं मैं रूक्मिणी , तब तो पूरी होगी ना यह करवा चौथ सही ढंग से।

सब कल्पना ही है, पर तब भी आप सुनो ना ! सुनो ना ! सुनो ना …....❤

– Nidhi (17-10-2019 ) ( 1:45 AM)

AN UNEXPECTED GIFT

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The book is provided by <a href=”https://www.facebook.com/arudhaclub ”> Arudha Club</a> in exchange for a genuine review.

BLURB :

‘Giving up is not an option when someone calls you mother.’

Abhay, still struggling with the grief of losing his wife, is unable to cope with his job and the care of his toddler son. So, when the mysterious Sheetal enters his life, applying for the job of looking after Ayush, he is thrilled.

All Sheetal has ever wanted, even as a child, is to be a mother. Circumstances mean that she might never be one. The almost instant bond between her and the young boy is balm to her soul and like a godsend to Abhay.

Still, something about Sheetal nags at him. She seems perfect, but why is she so reluctant to show him her identity card? What is she hiding?

What happens when Abhay finally discovers her secret? Does he stand by her side, or abandon her, as everyone before him has done? And what is the gift that she gives him, a gift that will change his life?

In An Unexpected Gift, bestselling writer Ajay K Pandey brings to us an emotionally resonant story that questions everything we believe about friendship, love and motherhood.

ABOUT THE AUTHOR :

Ajay K Pandey grew up with big dreams in the modest NTPC township of Rihand Nagar. He studied Engineering in Electronics at IERT (Allahabad) and then did his MBA at IIMM (Pune) before taking up a job in a corporate. He is currently working with Cognizant, Pune.

Apart from writing, he wants to follow his role model, Mother Teresa, and make a contribution to society. He aspires to start a charitable trust that would support aged people and educate children with special needs.

Ajay’s first book, You are the Best Wife, was published by Srishti Publishers in 2015, and went on to become a bestseller. Based on his life, it went straight to the hearts of his readers. The sequel, You are the Best Friend, was also received with much appreciation. His next two books, Her Last Wish and A Girl to Remember, have only expanded his fan base and cemented his place on the bestseller lists.

Ajay makes it a point to individually connect with and respond to all his readers, making him a personal favourite for many. He has also introduced many people to the world of reading.

MY REVIEW :

“An Unexpected Gift” by Ajay K. Pandey is a wonderful book. Although, I am already a big fan of him but then his books add more love in my heart for him. The very first line of the blurb itself is so meaningful as well as thoughtful. The three bonds of life friendship, love and motherhood that the author has mentioned in the blurb is well explained in the book. The cover of the book looks simple in first impression and even I felt that it could be better but towards reaching till the end I found that this simple cover is perfectly apt for this book.

The book holds the story of Abhay who lost his wife as she was suffering from brain cancer. Sheetal enters to his life as care taker of Abhay’s son Ayush. The bond between Ayush and Sheetal is equal like that a mother and a son share. Abhay and Sheetal bond of friendship also grows with time until one day Abhay comes to know a truth about Sheetal.
The author has very well portrayed the story keeping in mind the issue of society and how people deal and react to it. Lots of emotions comes to one’s heart while reading this book.
The simple language of the book , easy narrative skills of the author make the book more enjoyable. Overall, I read the book in one go and it is an amazing read.

RATING : 5/5

ORDER THE BOOK FROM : https://www.amazon.in/Unexpected-Gift-Ajay-K-Pandey/dp/9388689704/ref=mp_s_a_1_3?keywords=Ajay+k+pandey&qid=1563711288&s=gateway&sr=8-3

LOVE STORY OF A COMMANDO

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The book is provided by <a href=”https://www.facebook.com/arudhaclub ”> Arudha Club</a> in exchange for a genuine review.

BLURB :

Do we really have control over how we feel for somebody? Can we stop ourselves from falling for someone, even if we know he’s just not right and means only trouble?

Riya is a millennial who watches Splitsvilla, worships David Guetta, sways to Ed Sheeran tunes … She knows nothing of passion, agony, gallantry, sacrifice and love—until the day she meets Captain Virat. Captain Virat is a Black Cat commando with the NSG, India’s elite counter-insurgency Special Forces unit. He is swift, sharp, lethal and dark. He has trained across the globe and wrangled with many a dangerous situation. There’s nothing he cannot handle—except his own demons.

When Riya meets Virat at an art exhibition in Delhi, sparks fly, but he then just disappears, leaving her broken-hearted. Riya moves to Mumbai to start afresh, but a different kind of danger stalks her here. Under the burning dome of the Taj Palace hotel, Riya and Virat’s lives intersect once again. Then he leaves … again. Crushed, Riya decides to leave it all behind for the remoteness of a village in Kashmir. But peace is short-lived. The prime minister’s visit to the Valley brings violence, and gunfire, back into her life. As they find themselves behind the enemy lines in PoK, can Virat snatch her away from the jaws of death this time too? Can there be a happily ever after for Riya and Virat?

Love Story of a Commando brings together the mystique and perils of the uniform with an epic romance that must brave the fragility of these present times.

ABOUT THE AUTHOR :

An alumni of Birla Institute of Technology Mesra, Swapnil Pandey has worked in many places and held several positions, which is the trademark of any Army Wife. She has worked in Wipro, HDFC, taught at Lovely Professional University and the Army Public School, to name a few. She is also an active AWWA member.

Swapnil is a fitness freak, and a green tea addict who loves shoes and perfumes. She wears her ‘silent rank badges’ proudly, and loves compiling stories about life in the Indian Army on her blog. The extraordinary Army life has given her a vast canvas of stories, and helped her gain an insight into human emotions and struggles. The courageous veer naris, the extroverted Army brats, charming Army wives and the gallant soldiers whose lives are filled with joy, sorrow, adventure, and even horror, have inspired her to be a storyteller. She believes people should not only know about a soldier’s valour, but also about his hidden emotions. Love Story of a Commando is her second novel after the bestselling Soldier’s Girl: Love Story of a Para-Commando.

MY REVIEW :

“Love Story Of A Commando” by Swapnil Pandey holds the love story of a girl Riya and Captain Virat. The cover of the book has been designed beautifully. I strongly feel no other cover could do full justice. The blurb of the book broke my heart into million pieces. The book starts with a letter from Commando, A black cat. I swear this letter will melt your heart and bring tears to your eyes. Love at first sight is something most of the people have experienced in their life and so as a reader, I could connect well. The love story of Riya and Virat begins at an art exhibition. But then Virat leaves Riya in between and disappears. Riya with her broken heart decides to start fresh in life when she meet Virat again her life. I strongly feel this becomes the most difficult situation in one’s life. Although, with many twists and turns, the author has very well portrayed this storyline. This book made me so emotional all together but still I would recommend this to everyone because the ending has its own story and I am sure one will enjoy all the emotions that this book holds within its pages.

RATING : 5/5

ORDER THE BOOK FROM : https://www.amazon.in/Love-Story-Commando-Swapnil-Pandey/dp/9388754069/ref=mp_s_a_1_3?keywords=love+story+of+a+commando&qid=1563710149&s=gateway&sr=8-3

जीवन, रिश्ते और विश्वास..

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” रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय. टूटे पे फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परी जाय. “

कबीर का यह दोहा बचपन से कई दफा सुना था। वैसे तो याद भी हो चुका है । स्कूल में हिंदी कि शिक्षिका ने इसका उदाहरण कर के ही दिखा दिया था। तो कबीर के कुछ दोहों में एक यह है जो मुंह जबानी याद ही रह गई।

वैसे जीवन में ऐसे व्याख्या होते रहते है, की यह सब से हर इंसान जोड़ लेता है खुद को पर कभी कभी दिल सच्चाई स्वीकारना ही नहीं चाहता। विश्वास और प्रेम की डोर बहुत कच्ची होती है बिल्कुल सुई धागे वाले धागे की तरह। वो धागा भले खुद कच्चा हो, लेकिन बहुत फटे चीज़ों को जोड़ डालता है। और ऐसा जोड़ता है कि फिर बहुत कोशिश पर ही दुबारा फट पाता है।

ऐसे ही मनुष्य के जीवन के रिश्ते होते है। हम बहुत विश्वास कर के किसी दूसरे इंसान के साथ अपना रिश्ता जोड़ते है फिर चाहे वो दोस्ती का हो या फिर प्रेम का। आंख बंद कर के भरोसा करते है और फिर क्या होता है एक दिन वो इंसान उस भरोसे को चकनाचूर कर के चला जाता है और हम असहाय सा खड़ा देखते रहते है। खुद ही यकीन नहीं होता कि यह हमारे साथ क्या हुआ।

जब प्रेम का रिश्ता शुरू होता है तब दो लोगों की मंजूरी चाहिए होती है तो खत्म करते वक़्त एक की ही मर्ज़ी क्यूं? एक का मन भर गया और उसे अब छोड़ के जाना है इसलिए अब रिश्ता खत्म। उस दूसरे इंसान ने क्या बिगाड़ा है जो गुट गुट के अब सारी जीवन को बिताएगा ? हर पल मरेगा! हर एक सेकंड उसको काटेगा ! मौत को गले लगाने का मन करेगा उसका । उसने तो वफादारी से रिश्ता निभाया था तो उसको ही सज़ा क्यूं मिल रही? एक सेकंड में जिसको वो अपने जीने की वज़ह समझता है वो उसके जीवन को ज़िंदा लाश बनाने की वज़ह बन जाता है।

ठीक ऐसे ही दोस्ती का रिश्ता होता है। बहुत नाज़ुक होता है पर बहुत सारा विश्वास पर टिका रहता है। लोग अक्सर अपनी दोस्ती की मिसाल देने लगते है और फिर उन में से एक दोस्ती को दिल से ना निभा रहा हो! तो उस में उस दूसरे इंसान की क्या गलती? उसको क्यूं सज़ा मिलती है। वो क्यूं सोचने पर मजबूर रहता है कि कहां कमी रह गई थी। वो इंसान कितना गुटन महसूस करता है वो तो कोई समझ नहीं पाता। कितनी रातें यहीं सब सोचते सोचते बीता डालता है।
विश्वास का टूटना सब से बुरा होता है और अगर वो किसी इंसान का बार बार टूटता है तो वो इंसान को विश्वास तोड़ने वाले से नफ़रत नहीं होती है । बल्कि खुद से नफ़रत होती है कि शायद मेरे में ही कोई कमी है। मैं किसी के लायक है। और किसी इंसान का खुद से नफ़रत सब से बुरा होता है।

कितना आसान होता है सब के लिए कहना “मूव ऑन” कर जाओ। काश जितना छोटा यह शब्द है, जितना आसान होता है लोगों के लिए कहना इतना ही आसान होता करना भी। तो फिर दुनिया जीना बहुत आसान होता । ऐसा है लोगों के लिए आसान भी होता है पर जो लोग नहीं कर पाते उनका क्या ?

भावनाओं की कोई क़दर नहीं रह गई इस युग में। एक इंसान को तब ही कोई इंसान अच्छा लगता है जब वो सुंदर भी हो। अब प्यार पहले सुरत देख कर बाद में सीरत देख कर होता है। फिर भले वो सांवले रंग वाले इंसान को कितना भी प्रेम क्यूं ना हो, उसका प्रेम सुंदरता के आगे फीका पड़ ही जाता है। भावनाएं तो तब कोई किसी की समझेगा जब कोई किसी की क़दर करेगा, समझने की कोशिश करेगा। पर अपना वक़्त बर्बाद करना ही नहीं चाहता कोई? एक इंसान अपनी जान से ज़्यादा किसी से प्रेम कर बैठे पर दूसरे को एक ज़रा फर्क ही ना पड़े। कितना अन्याय है यह तो? उस इंसान की हालत का अंदाज़ा भी नहीं लगा पाता कोई क्यूंकि दुनिया के सामने वो हमेशा हंसते खेलता रहता। वो तो अकेलापन एक मात्र उसका साथी रह जाता है।

मुझे भगवान से बहुत शिकायतें है इस ही वजह से। उन्हें तो पता होता है कि एक इंसान का स्वभाव कैसा है तो उसके साथ बुरा क्यूं होने देते है। भगवान को तो पता होता है कि यह इंसान का सिर्फ दिल ही नहीं बल्कि वो इंसान खुद भी पूरा टूट जाता है। तो ऐसा होने से उनको बचाना चाहिए ना। पर वो भी पता नहीं किसकी सुनते है, किन का साथ देते है वो आज तक समझ नहीं पाई। भगवान को इतने भावुक इंसान को इस युग से बचाना चाहिए ना ? क्यूं भगवान ऐसे लोगों को मिलवाते है उन लोगों से जो उनको तोड़ डालता है। इंसान तो तोड़ के चला जाता है दूसरा इंसान अपने अन्दर कमियां ढूंढने में सारा समय लगा डालता है , परिणाम कुछ नहीं होता बस वो अंदर अंदर पल पल मर रहा होता है।

निधि (14/7/2019) (7:00 pm)